गोलियां बरसाते दुश्मन से सिर्फ़ सौ मीटर दूर जीना कैसा होता है?
बीते सत्तर सालों में दो पड़ोसियों भारत- पाकिस्तान के बीच तीन जंग लड़ी जा चुकी हैं. भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश नियंत्रण रेखा पर बड़ी संख्या में सैन्यबल तैनात करते हैं.
कश्मीर में दोनों देशों ने करीब एक लाख की तादाद में जवान तैनात किए हैं. ये दुनिया की उन जगहों में है जहां सबसे अधिक हथियारबंद सैनिक तैनात हैं.
कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिक इतने क़रीब तैनात हैं कि आप कह सकते हैं "वो एक दूसरे को आंखें तक दिखा सकते हैं"
बीबीसी ने ऐसे ही दो सैनिकों से बात की जो सीमा पर दुश्मन सैनिकों के काफी नज़दीक तैनात रहे हैं.
"पहले हम एक दूसरे पर लाइट मशीन गनों और मीडियम मशीन गनों से गोलियां बरसाते हैं. इसके बाद लड़ाई मोर्टार के ज़रिए होती है. हाल के सालों में हमने देखा है कि दोनों पक्षों ने असलहा-बारुद का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. अगर तनाव बढ़ा तो हमारे आला अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ता है और तनाव कम करने के लिए वो दूसरी तरफ बैठे अपने समकक्ष से बात करते हैं."
भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर दोनों देशों के बीच सैनिकों के बीच के तनावपूर्ण रिश्तों को कुछ इस तरह समझाते हैं.
परमाणु-हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर पर अपना दावा करते हैं. लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर कई जगह दोनों देशों की सेना एक दूसरे के काफी करीब तैनात होती हैं.
भारत और पाकिस्तान के एक-एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि एक सैनिक के लिए दुश्मन की बंदूक के इतने करीब होने, दिन-रात बंदूक के निशाने पर रहते हुए काम करने, वहां खाने- पीने और सोने का अनुभव कैसा होता है.
पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं, "अमन किसे पसंद नहीं होता. लेकिन अमन काल्पनिक विचार हैं. कई बार अमन की राह में चलने के लिए आपको लड़ाई करनी पड़ती है."
वहीं भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं, "आपको या तो मारना होता है या फिर मर जाना होता है. उस वक्त न तो इससे अधिक सोचने के लिए कुछ होता है न ही समझने के लिए."
भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी, कर्नल मुरुगनांथम कहते हैं, "बॉर्डर के आसपास हालात कभी भी स्थिर नहीं होते. हम उनके ठिकानों को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश करते हैं और वो हमारे ठिकानों को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश में होते हैं."
वो कहते हैं, "दोनों के बीच की ये खींचतान कभी नहीं रुकती. जो भी ऊंचाई पर बने ठिकानों पर कब्ज़ा करेगा वही पूरे इलाके में ताकतवर स्थिति में होगा."
एक युवा लेफ्टिनेंट के तौर पर मुरुगनांथम भारत प्रशासित कश्मीर में लाइन ऑफ़ कंट्रोल के एक हिस्से की सुरक्षा पर तैनात थे.
वो कहते हैं, "साल 1993 की बात है, उस वक्त पाकिस्तान भारत में चरमपंथी भेजने की कोशिश कर रहा था. हम लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर थे और हमारा काम इस पर लगाम लगाना था. जब भी दूसरी तरफ से फायरिंग शुरु होती थी हम समझ जाते थे कि ये चरमपंथियों को कवर करने के लिए किया जा रहा है. इसलिए हमें अधिक सतर्क रहना पड़ता था और चरमपंथियों पर नज़र रखनी होती थी."
कश्मीर में दोनों देशों ने करीब एक लाख की तादाद में जवान तैनात किए हैं. ये दुनिया की उन जगहों में है जहां सबसे अधिक हथियारबंद सैनिक तैनात हैं.
कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिक इतने क़रीब तैनात हैं कि आप कह सकते हैं "वो एक दूसरे को आंखें तक दिखा सकते हैं"
बीबीसी ने ऐसे ही दो सैनिकों से बात की जो सीमा पर दुश्मन सैनिकों के काफी नज़दीक तैनात रहे हैं.
"पहले हम एक दूसरे पर लाइट मशीन गनों और मीडियम मशीन गनों से गोलियां बरसाते हैं. इसके बाद लड़ाई मोर्टार के ज़रिए होती है. हाल के सालों में हमने देखा है कि दोनों पक्षों ने असलहा-बारुद का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. अगर तनाव बढ़ा तो हमारे आला अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ता है और तनाव कम करने के लिए वो दूसरी तरफ बैठे अपने समकक्ष से बात करते हैं."
भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर दोनों देशों के बीच सैनिकों के बीच के तनावपूर्ण रिश्तों को कुछ इस तरह समझाते हैं.
परमाणु-हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर पर अपना दावा करते हैं. लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर कई जगह दोनों देशों की सेना एक दूसरे के काफी करीब तैनात होती हैं.
भारत और पाकिस्तान के एक-एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि एक सैनिक के लिए दुश्मन की बंदूक के इतने करीब होने, दिन-रात बंदूक के निशाने पर रहते हुए काम करने, वहां खाने- पीने और सोने का अनुभव कैसा होता है.
पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं, "अमन किसे पसंद नहीं होता. लेकिन अमन काल्पनिक विचार हैं. कई बार अमन की राह में चलने के लिए आपको लड़ाई करनी पड़ती है."
वहीं भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं, "आपको या तो मारना होता है या फिर मर जाना होता है. उस वक्त न तो इससे अधिक सोचने के लिए कुछ होता है न ही समझने के लिए."
भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी, कर्नल मुरुगनांथम कहते हैं, "बॉर्डर के आसपास हालात कभी भी स्थिर नहीं होते. हम उनके ठिकानों को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश करते हैं और वो हमारे ठिकानों को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश में होते हैं."
वो कहते हैं, "दोनों के बीच की ये खींचतान कभी नहीं रुकती. जो भी ऊंचाई पर बने ठिकानों पर कब्ज़ा करेगा वही पूरे इलाके में ताकतवर स्थिति में होगा."
एक युवा लेफ्टिनेंट के तौर पर मुरुगनांथम भारत प्रशासित कश्मीर में लाइन ऑफ़ कंट्रोल के एक हिस्से की सुरक्षा पर तैनात थे.
वो कहते हैं, "साल 1993 की बात है, उस वक्त पाकिस्तान भारत में चरमपंथी भेजने की कोशिश कर रहा था. हम लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर थे और हमारा काम इस पर लगाम लगाना था. जब भी दूसरी तरफ से फायरिंग शुरु होती थी हम समझ जाते थे कि ये चरमपंथियों को कवर करने के लिए किया जा रहा है. इसलिए हमें अधिक सतर्क रहना पड़ता था और चरमपंथियों पर नज़र रखनी होती थी."
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