राहुल गांधी ने क्या वो कर दिखाया जिसकी कल्पना मोदी-शाह को नहीं थी?
2019 के आम चुनाव से ठीक पहले पाँच राज्यों के चुनावी परिणाम को फ़ाइनल से पहले का सेमीफ़ाइनल माना जा रहा था. इस सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में कांग्रेस ने ये दिखाया है कि वो बीजेपी को ना केवल उसके गढ़ में चुनौती दे सकती है, बल्कि उसे सत्ता से बाहर का रास्ता भी दिखा सकती है.
सबसे पहली बात तो यही है कि इन नतीजों ने राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले में खड़ा कर दिया है. राहुल ये साबित करने में कामयाब रहे हैं कि वे नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं, उनसे मुक़ाबला कर सकते हैं और उन्हें हरा भी सकते हैं.
वरिष्ठ पत्रकार और गांधी परिवार पर नज़दीकी नज़र रखने वाले रशीद किदवई बताते हैं, "ज़ाहिर है कि इन नतीजों से राहुल गांधी का कॉन्फिडेंस मज़बूत होगा और 2019 में वे कहीं ज़्यादा तैयारी से चुनाव मैदान में जाएंगे."
राहुल की इस जीत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15 सालों से चली आ रही बीजेपी सरकार के इन्कंबेंसी फैक्टर का भी योगदान रहा है, यही बात राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी के तौर पर कही जा सकती है.
बीबीसी हिंदी के साथ फ़ेसबुक लाइव में वरिष्ठ पत्रकार संजीव श्रीवास्तव ने कहा, "मध्य प्रदेश में उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे, हालांकि अंदरूनी होड़ ज़रूर थी लेकिन राहुल गांधी पार्टी को एकजुट रखने में कामयाब रहे."
राजस्थान: वसुंधरा, पायलट और गहलोत जीते
मध्य प्रदेश : करीबी रेस में कांग्रेस आगे, बीजेपी पीछे
छत्तीसगढ़ चुनाव परिणाम: कांग्रेस क्लीन स्वीप की ओर
इतना ही नहीं राहुल गांधी ने राजस्थान में भी ये सुनिश्चित किया कि बाहर से जाकर सचिन पायलट संगठन का काम कर सकें और बाद में अशोक गहलोत जैसा अनुभवी नेता राज्य में पहुंचकर में चुनावी अभियान को मज़बूत करे, हालांकि इन दोनों के बीच भी टिकट बंटवारे को लेकर आपसी गुटबाजी की ख़बरें आती रहीं लेकिन दोनों एक साथ मिलकर चुनावी रणनीति बनाते रहे.
राहुल गांधी ने कितनी की मेहनत
छत्तीसगढ़ में इस तरह से अपने नेताओं की आपसी खींचतान का सामना राहुल गांधी को नहीं करना पड़ा, लेकिन वहां पार्टी के पास कोई दमदार चेहरा भी नहीं था. ऐसे में ये माना जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने राहुल गांधी के चेहरे को ध्यान में रखकर वोट डाला है.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने 90 में 60 से ज़्यादा सीटें हासिल करने में कामयाब हुई है, इस राज्य में राहुल गांधी ने पांच दौरे करके करीब 18 चुनावी सभाओं को संबोधित किया.
राज्य के वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध बताते हैं, "राहुल गांधी की सभाओं में यहां भीड़ उमड़ रही थी, ख़ासकर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनती है तो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ़ कर देंगे और घोषणा पत्र के तमाम वादे समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे."
कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में बीजेपी की तुलना में करीब 10 फ़ीसदी ज़्यादा वोट मिले हैं. तीन राज्यों में सबसे ज़ोरदार जीत कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में ही मिली है.
मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी से कड़ी टक्कर भले मिली हो लेकिन राहुल गांधी के लिए भरोसा बढ़ाने वाली बात ये है कि ये दोनों राज्य भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ताकत के लिहाज से बेहद मज़बूत राज्य रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस का यहां जीत हासिल करने से कांग्रेस के लिए मोराल बूस्टर साबित होने वाला है.
सबसे पहली बात तो यही है कि इन नतीजों ने राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले में खड़ा कर दिया है. राहुल ये साबित करने में कामयाब रहे हैं कि वे नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं, उनसे मुक़ाबला कर सकते हैं और उन्हें हरा भी सकते हैं.
वरिष्ठ पत्रकार और गांधी परिवार पर नज़दीकी नज़र रखने वाले रशीद किदवई बताते हैं, "ज़ाहिर है कि इन नतीजों से राहुल गांधी का कॉन्फिडेंस मज़बूत होगा और 2019 में वे कहीं ज़्यादा तैयारी से चुनाव मैदान में जाएंगे."
राहुल की इस जीत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15 सालों से चली आ रही बीजेपी सरकार के इन्कंबेंसी फैक्टर का भी योगदान रहा है, यही बात राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी के तौर पर कही जा सकती है.
बीबीसी हिंदी के साथ फ़ेसबुक लाइव में वरिष्ठ पत्रकार संजीव श्रीवास्तव ने कहा, "मध्य प्रदेश में उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे, हालांकि अंदरूनी होड़ ज़रूर थी लेकिन राहुल गांधी पार्टी को एकजुट रखने में कामयाब रहे."
राजस्थान: वसुंधरा, पायलट और गहलोत जीते
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छत्तीसगढ़ चुनाव परिणाम: कांग्रेस क्लीन स्वीप की ओर
इतना ही नहीं राहुल गांधी ने राजस्थान में भी ये सुनिश्चित किया कि बाहर से जाकर सचिन पायलट संगठन का काम कर सकें और बाद में अशोक गहलोत जैसा अनुभवी नेता राज्य में पहुंचकर में चुनावी अभियान को मज़बूत करे, हालांकि इन दोनों के बीच भी टिकट बंटवारे को लेकर आपसी गुटबाजी की ख़बरें आती रहीं लेकिन दोनों एक साथ मिलकर चुनावी रणनीति बनाते रहे.
राहुल गांधी ने कितनी की मेहनत
छत्तीसगढ़ में इस तरह से अपने नेताओं की आपसी खींचतान का सामना राहुल गांधी को नहीं करना पड़ा, लेकिन वहां पार्टी के पास कोई दमदार चेहरा भी नहीं था. ऐसे में ये माना जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने राहुल गांधी के चेहरे को ध्यान में रखकर वोट डाला है.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने 90 में 60 से ज़्यादा सीटें हासिल करने में कामयाब हुई है, इस राज्य में राहुल गांधी ने पांच दौरे करके करीब 18 चुनावी सभाओं को संबोधित किया.
राज्य के वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध बताते हैं, "राहुल गांधी की सभाओं में यहां भीड़ उमड़ रही थी, ख़ासकर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनती है तो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ़ कर देंगे और घोषणा पत्र के तमाम वादे समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे."
कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में बीजेपी की तुलना में करीब 10 फ़ीसदी ज़्यादा वोट मिले हैं. तीन राज्यों में सबसे ज़ोरदार जीत कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में ही मिली है.
मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी से कड़ी टक्कर भले मिली हो लेकिन राहुल गांधी के लिए भरोसा बढ़ाने वाली बात ये है कि ये दोनों राज्य भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ताकत के लिहाज से बेहद मज़बूत राज्य रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस का यहां जीत हासिल करने से कांग्रेस के लिए मोराल बूस्टर साबित होने वाला है.
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